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मुंबई : सरकार ने 15 जून से रेड जोन में ऑनलाइन क्लास और ग्रीन जोन में स्कूल खोलने का आदेश दिया है. दोनों तरह से क्लास शुरू करने में कई दिक्कतें आ रही हैं. शिक्षक, उनके संगठन और अभिभावकों ने इन दिक्कतों को लेकर नाराजगी जताई है. शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब तक कोरोना संक्रमण खत्म नहीं हो जाता, तब तक ऑनलाइन और ऑफलाइन कक्षाएं चलाना मुश्किल है, क्योंकि ऑनलाइन के लिए सभी छात्रों के पास मोबाइल नहीं है और इस महामारी में लोग जान बचाएंगे या क्लास के लिए मोबाइल खरीदेंगे. यदि कक्षाएं ग्रीन जोन में चलाई जाती हैं तो क्या गारंटी कि किसी छात्र में कोरोना संक्रमण नहीं होगा. एक छात्र में हुआ तो कई छात्रों में संक्रमण फैल सकता है. 

मुंबई मुख्याध्यापक संघ के सचिव प्रशांत रेडीज ने कहा कि अधिकांश अभिभावक बच्चों को लेकर गांव चले गए हैं, क्या उनके साथ अन्याय नहीं होगा और जो छात्र मुंबई में हैं, उन सभी के पास लैपटॉप या मोबाइल नहीं है. उन्होंने कहा कि जिन घरों में सिर्फ एक मोबाइल है, लॉकडाउन खुलने से अभिभावक अपनी नौकरी पर जाएंगे तो वह छात्र कैसे ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेगा. आर्थिक तंगी में अभिभावक अतिरिक्त मोबाइल भी नहीं खरीद सकते हैं. मोबाइल न रहने से क्या उस छात्र के साथ अन्याय नहीं होगा. रेडीज ने कहा कि जब तक कोरोना का खात्मा नहीं हो जाता या स्थितियां सामान्य नहीं हो जातीं, तब तक स्कूलों को खोलना या ऑनलाइन क्लास चलाना न्याय संगत नहीं होगा. 

कुर्ला (पश्चिम) स्थित शिवाजी विद्यालय एवं जूनियर कॉलेज के प्रिंसिपल गोरखनाथ राजूरे ने कहा कि मुंबई में कोरोना के जो हालात हैं, उससे अगस्त तक ऑनलाइन या ऑफलाइन क्लास चलाना मुश्किल होगा. उन्होंने कहा कि यदि सितंबर में स्कूल खुले और फर्स्ट यूनिट टेस्ट तथा अंतिम सेमेस्टर इग्जाम हो तो भी पढ़ाई का कार्य पूरा हो सकता है और इससे मौजूदा दौर में कोरोना संक्रमण से भी लोगों की रक्षा हो सकती है. अधिकांश अभिभावकों ने भी ऑनलाइन क्लास को सही नहीं ठहराया है. उनका कहना है कि जब तक हर घर में दो मोबाइल नहीं हो तब तक ऑनलाइन क्लास चलाना मुश्किल होगा.


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