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अमेरिका के एक प्रभावशाली द्विदलीय कांग्रेसनल कॉकस ने कहा कि चीन सीमा पर यथास्थिति बदलने और भारतीय सेना को चुनौती देने के लिए उसके साथ किए समझौतों के विपरीत काम कर रहा है और उसने उम्मीद जताई कि बीजिंग वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अत्यधिक हथियारों तथा बुनियादी ढांचे को कम करेगा। भारत और भारतीय अमेरिकियों पर कांग्रेसनल कॉकस ने गलवान घाटी में शहीद हुए सैन्यकर्मियों के प्रति भी बृहस्पतिवार (16 जुलाई) को शोक जताया।

भारत और चीन की सेना के बीच पांच मई से पैंगोंग सो, गलवान घाटी और गोगरा हॉट स्प्रिंग समेत पूर्वी लद्दाख के कई इलाकों में आठ हफ्तों से अधिक समय से गतिरोध चल रहा है। पिछले महीने गलवान घाटी में झड़पों में 20 भारतीय सैन्यकर्मियों के शहीद होने के बाद हालात बिगड़ गए।

कॉकस के सह-अध्यक्ष सांसद जॉर्ज होल्डिंग और ब्रैड शरमन ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा, ''भारत और भारतीय अमेरिकियों पर कॉकस के सदस्य होने के नाते हम 15 जून को गलवान घाटी इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हुई घटनाओं से बहुत निराश हैं।"

उन्होंने अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू को लिखे पत्र में कहा कि पिछले कुछ महीनों में चीनी अधिकारियों ने एलएसी पार करने की कोशिश की जिसके बाद छह जून को एलएसी से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया लागू करने के लिए कूटनीतिक चर्चा हुई। इस पत्र पर सात अन्य सांसदों ने भी हस्ताक्षर किए हैं।
पत्र में कहा गया है, ''समझौते के महज नौ दिनों बाद चीन ने एलएसी पर भारतीय सीमा की ओर नया ढांचा खड़ा करने की कोशिश की।" इसमें कहा गया है, ''हम शहीद सैनिकों के परिवारों के प्रति संवदेनाए जताते हैं। हम निराश हैं कि चीन सीमा पर यथास्थिति बदलने और भारतीय सेना को चुनौती देने के लिए भारत के साथ अपने समझौतों के विपरीत काम कर रहा है।" पत्र में कहा गया है, ''हम उम्मीद जताते हैं कि वे वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अत्यधिक हथियारों और बुनियादी ढांचों को कम करेंगे और भारत के साथ समझौतों को बरकरार रखेंगे।

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