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ठाणे : ठाणे के घोड़बंदर रोड स्थित होराईजन प्राइम अस्पताल पर पहली कार्रवाई मनपा कमिश्नर डॉ विपिन शर्मा ने ओवरचार्जिंग के मामले में की है. जोकि राज्य की पहली इस प्रकार की कड़ी कार्रवाई मानी जा रही है. उक्त अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों से ज्यादा बिल वसूली के मामले में दोषी पाया गया है. जिसके बाद निजी अस्पताल के कोविड दर्जे को हटा दिया गया है और उसके रजिस्ट्रेशन को एक माह के लिए रद्द कर दिया गया है. साथ ही अस्पताल में नए मरीजों की भर्ती पर पाबंदी लगाई गयी है.

शहर के घोड़बंदर रोड स्थित होराईजन प्राइम अस्पताल की तरफ से 12 जुलाई तक 796 मरीजों का उपचार किये जाने की बात सामने रखी गयी थी. मनपा के ऑडिटरों द्वारा 57 बिलों की छानबीन की गयी उसमे 56 बिलों में साढ़े 6 लाख 9 हजार की आपत्तिजनक वसूली करने का खुलासा हुआ था. 20 जुलाई को अस्पताल को नोटिस जारी की गयी थी और लिखित जबाब मांगा गया था. लेकिन समय बीतने के बावजूद अस्पताल की तरफ से कोई लिखित जबाब मनपा को नहीं मिला. जिसके बाद अस्पताल को कोरोना मरीजों की सेवा में असमर्थ होने तथा मरीजों से गैर वाजिब बिल की वसूली का दोषी करार दिया गया. परिणामस्वरूप कमिश्नर डॉ विपिन शर्मा ने अस्पताल के कोविड दर्जे को हटा दिया और उसके रजिस्ट्रेशन को एक माह के लिए रद्द कर दिया है. 

अस्पताल में 2 सदस्यीय समिति की नियुक्ति गयी है. जिसमे शिवाजी अस्पताल के मेडिसिन विभाग की प्रेषिता डॉक्टर क्षीरसागर तथा कनिष्ठ ऑडिटर बालासाहेब कारंडे हैं. अस्पताल में भर्ती अंतिम मरीज के डिस्चार्ज होने तक दोनों अस्पताल पर ध्यान रखेंगे.

सूत्रों के अनुसार कुछ अन्य अस्पतालों के ख़िलाफ भी मनपा इस तरह का कदम जल्द उठा सकती है. शहर में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 16 निजी अस्पतालों को मरीजों के उपचार के लिए मनपा की तरफ से अधिगृहित किया गया था, लेकिन जैसे-जैसे मरीज बढ़ रहे थे वैसे-वैसे इन अस्पतालों की तरफ से मरीजों से बड़े पैमाने पर बिलों की वसूलने के आरोप लगने लगे थे. अस्पतालों की मनमानी वसूली को लेकर भाजपा विधायक निरंजन डावखरे, नगरसेवक नारायण पवार, ठाणे कांग्रेस अध्यक्ष विक्रांत चव्हाण, स्वाभिमान संगठन के विजय त्रिपाठी, मनसे विद्यार्थी विंग के अध्यक्ष संदीप पाचंगे और सामाजिक संस्था मतदाता जागरण अभियान से जुड़े लोगों ने मनपा कमिश्नर सहित राज्य प्रशासन को पत्र लिखकर शिकायत की थी. 

शिकायतों के मद्देनजर तत्कालीन आयुक्त विजय सिंघल ने विगत मई माह में अस्पतालों के लिए दर निर्धारित की थी. उसके बावजूद भी अस्पताल ओवर चार्जिंग से बाज नहीं आ रहे थे. जिसके बाद पिछले दिनों वर्तमान आयुक्त डॉक्टर विपिन शर्मा के निर्देश पर मनपा लेखा विभाग प्रमुख किरण तायड़े की अध्यक्षता में 8 ऑडिटरों की नियुक्ति सभी निजी अस्पतालों के बिल की जाँच के लिए की गयी थी. अस्पतालों में निरीक्षण के दौरान कुल 1 हजार 752 बिलों का भुगतान प्राप्त होने की बात सामने आयी थी. इसमें से ऑडिटरों ने संदेहास्पद 486 बिलों की जांच की जिसमे 196 बिलों में आपत्तिजनक भुगतान का खुलासा हुआ जिसमे मरीजों से 27 लाख रुपये अधिक वसूले गए थे. इसके बाद मनपा की तरफ से सभी अस्पतालों को नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर उसका लिखित कारण देने की मांग की गयी थी.  


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