मुंबई, केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को कहा कि पुरानी गाड़ी बेचकर नया वाहन खरीदने के इच्छुक लोगों के लिए अच्छी खबर है। यदि वे अपना पुराना वाहन सरकार की वाहन कबाड़ नीति के तहत बेच देते हैं तो उन्हें नया वाहन खरीदने पर वाहन निर्माताओं की ओर से पांच फीसदी की छूट मिलेगी।

केंद्र ने स्वैच्छिक वाहन कबाड़ नीति का एलान आम बजट 2021-22 में किया था। इसके अनुसार, निजी वाहनों को 20 साल और वाणिज्यिक वाहनों को 15 साल बाद फिटनेस परीक्षण कराना आवश्यक होगा।

गडकरी ने कहा कि नीति में चार अहम घटक हैं। छूट के अलावा प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों पर हरित कर और अन्य शुल्कों का प्रावधान भी किया गया है। इसके लिए पुराने वाहनों का ऑटोमेटेड सुविधा केंद्रों पर फिटनेस और प्रदूषण जांच को अनिवार्य किया गया है। ये ऑटोमेटेड फिटनेस केंद्र देशभर में होंगे और इस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

आगे कहा कि ये ऑटोमेटेड फिटनेस जांच केंद्र सरकारी निजी साझेदारी में बनाए जाएंगे और स्क्रैप सेंटरों के लिए सरकार निजी साझेदारों और प्रदेश सरकारों की मदद करेगी। उन्होंने कहा कि ऑटोमेटेड टेस्ट में नाकाम होने वाले वाहनों को चलाए जाने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और इन्हें जब्त भी किया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि नई नीति से आने वाले सालों में भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का कारोबार 30 फीसदी बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच जाएगा जोकि अभी करीब 4.50 लाख करोड़ रुपये का है। साथ ही इसके एक्सपोर्ट कंपोनेंट जो अभी 1.45 लाख करोड़ है, वह भी बढ़कर 3 लाख करोड़ हो जाएगा। 

उन्होंने कहा कि वाहन कबाड़ नीति से न केवल अर्थव्यवस्था में सुधार में मदद मिलेगी बल्कि ऑटो इंडस्ट्री को भी लाभ होगा। साथ ही वाहनों का प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में ऑटो इंडस्ट्री सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले क्षेत्रों में शामिल होगा और इससे देश में करीब 50 हजार से अधिक रोजगार बढ़ेंगे। 

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, अभी ऑटो सेक्टर को नए वाहन के निर्माण के लिए स्टील, रबर एल्युमीनियम और रबर को आयात करना पड़ता है जिससे नए वाहनों की कीमत बढ़ जाती है। कबाड़ नीति के लागू होने के बाद स्टील, रबर एल्युमीनियम और रबर के आयात की जरूरत नहीं होगी और इससे वाहनों की कीमतों में 30 से 40 फीसदी की कमी आएगी।

उन्होंने कहा कि यह नीति हरित ईंधन और इलेक्ट्रिसिटी को बढ़ावा देने के साथ ही वाहनों के बेहतर माइलेज के लिए नई तकनीक को बढ़ावा देगा और इससे देश के भारीभरकम 8 लाख करोड़ रुपये के कच्चे तेल के आयात बिल में भी कमी लाएगा जिसके बढ़कर 18 लाख करोड़ रुपये होने की संभावना है। 


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