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नवी मुंबई : नवी मुंबई में हुए कथित आवासीय घोटाले की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने का फैसला किया है। उद्योग मंत्री उदय सामंत ने बुधवार को विधान परिषद में इसकी घोषणा की। शहरी विकास विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी इस जांच कमेटी का नेतृत्व करेंगे। उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बजट सत्र में शहरी विकास विभाग से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए उदय सामंत को अधिकृत किया है। सामंत ने सदन को भरोसा दिया कि नेरुल में नियमों के खिलाफ जाकर बिल्डिंग परमिशन देने वाले सिडको (सीआईडीसीओ) अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नवी मुंबई में निर्माण की अनुमति देने का असली अधिकार नवी मुंबई नगर निगम (एनएमएमसी) के पास है।

यह मामला एनसीपी (शरद पवार गुट) के एमएलसी शशिकांत शिंदे ने उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि नवी मुंबई में कुछ बिल्डरों ने सस्ते घरों के लिए तय 20 प्रतिशत आरक्षण के नियम को नजरअंदाज किया। इस आरक्षित जमीन का इस्तेमाल महंगे फ्लैट और कमर्शियल बिक्री के लिए किया गया। शिंदे के अनुसार, डेवलपर्स ने गरीबों के लिए बनने वाले 2,000 से ज्यादा घर नहीं बनाए। जांच कमेटी इस बात की गहराई से पड़ताल करेगी कि सस्ते घर बनाने के नियमों को कैसे दरकिनार किया गया। सरकार ने साफ किया है कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और बिल्डरों को बख्शा नहीं जाएगा। 

 

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