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मुंबई : भांडुप इलाके में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है. यहां ठगों ने खुद को एटीएस  और एनआईए अधिकारी बताकर एक सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर को दिल्ली बम धमाकों और मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी दी। आरोपियों ने पीड़ित को पूरे 54 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और उनसे कुल 40.90 लाख रुपये ठग लिए. मुंबई साइबर सेल अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच में जुट गई है.

जानकारी के मुताबिक, ठगी के शिकार राजेंद्र तुकाराम सुर्वे (61) महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक से मैनेजर पद से रिटायर हो चुके हैं. उन्हें 10 मार्च 2026 को सिग्नल ऐप पर एक कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली एटीएस का पुलिस का सब-इंस्पेक्टर  सिंह बताया. उसने दावा किया कि जनवरी में दिल्ली में हुए बम धमाकों और करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग में सुर्वे का नाम आया है.

ठगों ने सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेशों का हवाला देकर डराया

ठगों ने उन्हें डराया कि उनके पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर्नाटक में एक बैंक खाता खोलने के लिए किया गया है, जिससे 2.65 करोड़ का संदिग्ध लेन-देन हुआ है. ठगों ने सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेशों का हवाला देकर सुर्वे को मानसिक रूप से इतना तोड़ दिया कि वे उनके हर निर्देश को मानने लगे.  उन्हें घर के एक कमरे में कैद रहने और किसी से भी बात न करने की हिदायत दी गई. ठगों ने पहले उनसे 2.90 लाख रुपये वसूले.  इसके बाद उन्हें शेयर मार्केट में निवेश किए गए 29 लाख रुपये के शेयर बेचने पर मजबूर किया गया, जिसमें से 28 लाख रुपये ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए गए. हद तो तब हो गई जब बेल सिक्योरिटी के नाम पर 10 लाख रुपये और मांगे गए, जिसे पीड़ित की पत्नी ने लोन लेकर चुकाया.

ठगों की जालसाजी समझने में हुई देर

जालसाजों ने पीड़ित को भरोसा दिलाया था कि जांच पूरी होने के बाद उनकी रकम दो दिनों में वापस कर दी जाएगी. हालांकि, पैसे मिलते ही ठगों ने संपर्क काट दिया. काफी इंतजार के बाद जब कोई जवाब नहीं मिला, तब सुर्वे को अपने साथ हुई बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ.  उन्होंने 3 मई को साइबर हेल्पलाइन और 4 मई 2026 को औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराई. साइबर सेल अब उन बैंक खातों को ट्रैक कर रही है जिनमें ठगी की रकम भेजी गई है.


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