सेशन कोर्ट का बड़ा फैसला, मसिना हॉस्पिटल के डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई रद्द
मुंबई : सेशन कोर्ट ने मसिना हॉस्पिटल के वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. यूसुफ ए. माचिसवाला के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया है। यह मामला एक 64 वर्षीय बिज़नेसमैन की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिसमें डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता तुषारकांति गगनचंद दास ने आरोप लगाया था कि उनके परिवार के सदस्यों ने कथित रूप से डॉ. माचिसवाला की मदद से उन्हें बाइपोलर मूड डिसऑर्डर और स्किज़ोअफेक्टिव साइकोसिस से पीड़ित बताया था। उनका दावा था कि यह मेडिकल डायग्नोसिस गलत तरीके से किया गया और इसके पीछे साजिश हो सकती है।
इस शिकायत के आधार पर मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट, मझगांव ने डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। मामला आगे बढ़ते हुए सेशन कोर्ट में पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद अदालत ने डॉक्टर को राहत दे दी। सेशन कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि डॉक्टर द्वारा किया गया कार्य किसी भी प्रकार के आपराधिक कृत्य के दायरे में नहीं आता। अदालत ने कहा कि एक चिकित्सक के रूप में डॉ. माचिसवाला ने मरीज को भर्ती किया, उसकी जांच की और विभिन्न मेडिकल टेस्ट, इतिहास और क्लिनिकल मूल्यांकन के आधार पर बीमारी का निदान किया।
अदालत के अनुसार, जब जांच और उपलब्ध मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर यह पाया गया कि मरीज को स्किज़ोअफेक्टिव साइकोसिस जैसी स्थिति है और उसे उपचार की आवश्यकता है, तो डॉक्टर ने उसका इलाज शुरू किया। यह पूरा कार्य चिकित्सकीय दायित्वों के अंतर्गत आता है और इसे अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि डॉक्टर का कर्तव्य मरीज की स्थिति का सही आकलन करना और उचित इलाज प्रदान करना होता है। ऐसे में केवल मेडिकल रिपोर्ट और निदान के आधार पर डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक मामला बनाना उचित नहीं है।
इस फैसले के बाद डॉ. माचिसवाला को बड़ी राहत मिली है और उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी गई है। यह निर्णय मेडिकल प्रैक्टिस और डॉक्टरों की कानूनी सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मामले ने मेडिकल प्रोफेशन और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर भी बहस को जन्म दिया था, जहां यह सवाल उठे थे कि मानसिक बीमारियों के निदान और उपचार की प्रक्रिया में कानूनी हस्तक्षेप कितना उचित है। अब सेशन कोर्ट के इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि चिकित्सकीय निर्णय, यदि वैज्ञानिक और मेडिकल आधार पर लिए गए हों, तो उन्हें आपराधिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता।