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मुंबई: महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में 4,351 पक्षी मृत पाए गए हैं। 8 जनवरी के बाद एक दिन में हुई यह सबसे ज्यादा मौतें हैं। इसी के साथ राज्य में अब तक बर्ड फ्लू से मरने वाले पक्षियों की संख्या बढ़कर 8273 तक पहुंच गई है। इनमें सबसे अधिक 3,700 मुर्गे और मुर्गियों यवतमाल के सांवरगढ़ तालुका में मृत हए हैं। पुणे, मुंबई, ठाणे समते राज्य के 9 जिलों के 17 स्थानों पर बर्ड फ्लू के मामले मिले हैं। इन जगहों पर मुर्गा और मुर्गी, बगुले, कौवों और कबूतरों, तोतों की मौत हुई है।

पुणे में बर्ड फ्लू के बढ़ते खतरे को देखते हुए पुणे महानगर पालिक (पीएमसी) ने सभी वार्ड ऑफिसर के लिए चेकिंग अभियान शुरू करने का आदेश बुधवार को दिया है। नगरपालिका आयुक्त रुबल अग्रवाल ने कहा कि पीएमसी को शहर के विभिन्न हिस्सों में कौवों और कबूतरों के मरने की जानकारी मिली है। कई जगहों के जांच के नमूने अभी आने बाकी हैं। पुणे के निवासियों से अपील की गई है कि वे हमें शहर में पक्षियों की मौत के बारे में सूचित करने के लिए 18001030222 पर कॉल करें।

यवतमाल में 3700, पालघर में 106, सतारा में 26, सोलापुर में 2, नाशिक में 7, अहमदनगर में 22, बीड में 145, नांदेड में 95, अमरावती में 50, नागपुर में 96 और वर्धा में 102 पोल्ट्री पक्षी की मौत हुई है। मुंबई में 2, ठाणे में 38 पुणे में 1, जलगांव में 1, अहमदनगर में 1, नांदेड़ में 1, अमरावती में 1 और गोंदिया में 4 सहित विभिन्न जिलों में कुल 49 पक्षियों की मौत हुई है।

जिन जगहों पर बर्ड फ्लू के मामले मिले हैं उसके एक किलोमीटर के दायरे में बने पोलिट्री फार्म्स पर मौजूद 25229 मुर्गे-मुर्गियों को अब तक वैज्ञानिक रूप से नष्ट कर दिया गया है। यहां 1091 अंडे और 4215 किलोग्राम पोल्ट्री फीड भी नष्ट किए गए हैं। यही नहीं 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले फार्म्स पर मौजूद पक्षियों के नमूनों की जांच करवाई गई है।

बर्ड फ्लू के बढ़ते खतरे ने महाराष्ट्र में पोल्ट्री बिजनेस की कमर तोड़ कर रख दी है। पुणे के भोर इलाके में 'रेड फ्रेश चिकन' नाम से एक पोल्ट्री फार्म चलाने वाली कविता मिटकर ने बताया,'बर्ड फ्लू की वजह से हमारा बिजनेस 90 प्रतिशत तक कम हो गया है। लॉकडाउन के बाद जहां एक किलो चिकन 250 रुपए तक बिक रहा था, अब यह कम होकर 50-60 रुपए तक पहुंच गया है।'

कविता मिटकर ने आगे बताया, 'एक मुर्गे को फीड करवाकर पूरी तरह तैयार करने में 80-85 रुपए का खर्च आता है, लेकिन यह 50 रुपए में बिक रहा है यानी लागत से भी 30 रुपए कम मिल रहा है। मजबूरी में हम इसे औने-पौने दाम पर किसी तरह बेच रहे हैं। हमने इनकी फीड भी आधी कर दी है। अभी तक हम इन्हें दिन में सिर्फ एक बार फीड करवा रहे हैं। कई बार इन्हें सिर्फ गेहूं या अन्य अनाज दे रहे हैं।'


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